Income Tax Rules 2026: बदल गए 8 बड़े नियम, आम आदमी की जेब पर सीधा प्रहार !
वर्ष 2026 से भारत के आयकर सिस्टम में कई बड़े बदलाव लाए गए हैं, जिनसे सैलरी आदमी और निवेशक दोनों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। नीचे आठ प्रमुख नियमों के बारे में सरल हिंदी में जानकारी दी गई है, जो आपके टैक्स और निवेश पर सीधा असर करेंगे
1. नया आयकर अधिनियम 2026
1 अप्रैल 2026 से पुराना “Income Tax Act, 1961” खत्म होकर जगह लेगा “Income Tax Act, 2025”, जो भाषा और प्रक्रियाओं को आसान बनाकर डिस्प्यूट कम करने की कोशिश करता है। इसके बावजूद टैक्स स्ट्रक्चर लगभग वही दिखता है, लेकिन अब साफ‑सुथरे नियमों और फॉर्मों पर जोर दिया गया है।
2. 12 लाख तक आय में “मोटे तौर पर टैक्स फ्री
नए टैक्स रीज़ीम के तहत ₹12 लाख तक की सालाना आय पर व्यावहारिक रूप से टैक्स नहीं लगता, क्योंकि अब Section 87A के तहत तकरीबन ₹60,000 तक का रिबेट मिलता है।
इसका मतलब है कि जो मिडिल‑क्लास सैलरी घर पर दबाव थोड़ा कम होगा, लेकिन यह बोनस सिर्फ नए रीज़ीम में लेना है, जहाँ पुरानी छूटें/डिडक्शन नहीं चलतीं।
3. नए टैक्स स्लैब जो बदले
अप्रैल 2026 से नए टैक्स स्लैब इस तरह हैं:
₹0–4 लाख – 0%
₹4–8 लाख – 5%
₹8–12 लाख – 10%
₹12–16 लाख – 15%
₹16–20 लाख – 20%
₹20–24 लाख – 25%
₹24 लाख से ऊपर – 30%
दूसरे शब्दों में, जो आमदनी 12 लाख तक जाती है, वह “सीधे मार्जिनल रेट” से बच जाती है, लेकिन 12–24 लाख के बीच टैक्स रेट धीरे‑धीरे बढ़ता जाता है।
4. PAN और छोटे लेनदेन में राहत
बजट 2026 में छोटे लेनदेन पर PAN की अनिवार्यता में ढील की घोषणा की गई है, ताकि छोटे व्यापारी और सेवा देने वालों पर वार्षिक रिटर्न या KYC का बोझ कम पड़े।
लेकिन बड़े cash या बैंक ट्रांजैक्शन पर सरकारी निगरानी और TDS/TCS की पकड़ कड़ी हो गई है, जिससे काले धन की चाल घटने की उम्मीद है।
5. ट्रेडिंग और शेयर बाजार पर नया टैक्स
बड़े ट्रेडर्स और ऑनलाइन ट्रेडर्स के लिए 2026 के नियम कठिन हुए हैं। अब शेयर बायबैक (buyback) से मिलने वाली राशि को कैपिटल गेन की तरह टैक्स किया जाएगा।
फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT 0.005% और ऑप्शन प्रीमियम पर 0.15% STT लगाया गया है, जिससे ट्रेडिंग की कॉस्ट बढ़कर निवेशकों की जेब पर दबाव डाल रही है।
6. बच्चों की पढ़ाई पर भत्ते में बदलाव
बच्चों के एजुकेशन अलाउंस और हॉस्टल अलाउंस पर टैक्स राहत में बड़ा बदलाव हुआ है। पहले यह छूट बहुत कम होती थी, अब नए नियमों के अनुसार यह बढ़ाकर हर बच्चे के लिए मासिक एजुकेशन अलाउंस लगभग ₹3,000 और हॉस्टल अलाउंस लगभग ₹9,000 मासिक कर दिया गया है।
7. ULIP और बड़े इन्श्योरेंस पर टैक्स बदलाव
बीमा और निवेश के मिश्रण वाले ULIP पॉलिसी पर नए नियम सख्त हैं: अब सालाना premium ₹2.5 लाख से ज्यादा होने पर ULIP को अधिकतर कैपिटल गेन की तरह टैक्स किया जाएगा।
8. इनकम टैक्स रिटर्न और ऑडिट डेडलाइन
2026 के नियमों के तहत बिना टैक्स ऑडिट वाले छोटे व्यवसायों और प्रोफेशनल्स के लिए ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त तक बढ़ाई गई है, ताकि आम व्यापारी समय अधिक दिया जा सके। साथ ही ऑडिट वाले केस में डिडक्शन/क्लेम और टैक्स लैबिलिटी पर ज्यादा सख्ती व TDS/TCS रिकन्सिलिएशन द्वारा पकड़ बढ़ाई गई है, जिससे छोटे‑मोटे ठगी वाले टैक्स ट्रिक पर ब्रेक लग रहा है